Friday, May 8, 2026

आसमानों पे फ़क़त चाँद सितारे निकले

आसमानों  पे   फ़क़त   चाँद  सितारे   निकले
मेरी आँखों में  तो तुम इन से भी प्यारे  निकले

अपने   जैसी  कोई  तस्वीर  बनानी   थी  मुझे
मिरे   अंदर  से    सभी    रंग   तुम्हारे   निकले

हम ने महसूस किया ही था तुझे आज की शाम
जो   हुई  रात  तो  पलकों   पे  सितारे   निकले

मुझ में इक रोज़ कोई क़त्ल हुआ था और  फिर
मेरी  आँखों   से  बहुत  ख़ून  के   धारे   निकले

मैं  ने  सोचा  था  कि  नम-ख़ुर्दा  है  मेरी  मिट्टी
छू  के  देखा  तो   तह-ए-ख़ाक  शरारे   निकले ।








सालिम सलीम ✍️




 

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