जरें जरें में रब की निगाहे कर्म है
कभी ये नहीं कहना
कि औरों पर ज्यादा और मुझ पर कम है...!!
कभी ये नहीं कहना
कि औरों पर ज्यादा और मुझ पर कम है...!!
गुलज़ार ✍️
यह प्रसिद्ध शेरो-शायरी, जो अक्सर गुलज़ार के हवाले से कही जाती है, जीवन में संतोष, ईश्वर के प्रति आस्था और तुलना न करने का संदेश देती है। इसका अर्थ यह है कि ईश्वर की कृपा दुनिया के हर कण में मौजूद है, इसलिए कभी यह शिकायत नहीं करनी चाहिए कि दूसरों को ज्यादा और मुझे कम मिला है।
शायरी का अर्थ और विस्तार:
"जरें जरें में रब की निगाहें करम है": ईश्वर या रब की दयालुता और कृपा ब्रह्मांड के छोटे-से-छोटे कण (जर्रे) में मौजूद है। वह किसी एक को नहीं, बल्कि सबको देख रहा है।
"कभी ये नहीं कहना कि औरों पर ज्यादा...": हमें कभी भी अपनी तुलना दूसरों से नहीं करनी चाहिए कि ईश्वर ने उन्हें अधिक आशीर्वाद या संपत्ति दी है।
"...और मुझ पर कम है": यह भावना इंसान को दुखी और असंतोषी बनाती है।

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