Sunday, April 12, 2026

न जाने कौन सी शिकायतों के हम शिकार हो गए


 

न जाने कौन सी शिकायतों के हम शिकार हो गए,
जितना दिल साफ़ रखा, उतने ही गुनहगार हो गए
गुलज़ार ✍️ 

यह शायरी सादगी, ईमानदारी और भरोसे के बदले मिलने वाली बेवफाई या गलतफहमी को दर्शाती है। इसका अर्थ है कि जब आप लोगों के साथ निश्छल और साफ दिल से व्यवहार करते हैं, तो अक्सर लोग आपकी इसी सच्चाई को आपकी कमजोरी समझ लेते हैं और आपको ही दोषी ठहरा देते हैं। 

इस शेर के भाव:

दोषमुक्त व्यवहार: साफ दिल से रिश्ते निभाने का प्रयास।
अनजान कसूर: समझ नहीं आता कि किस गलती के लिए सजा मिल रही है।
परिणाम: ईमानदारी के बदले गलतफहमी या 'गुनहगार' समझा जाना।

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