Saturday, April 11, 2026

इज़्ज़तें, शोहरतें, चाहतें, उल्फ़तें...


 

"इज़्ज़तें, शोहरतें, चाहतें, उल्फ़तें...
कोई भी चीज़ दुनिया में रहती नहीं।
आज मैं हूँ जहाँ, कल कोई और था...
ये भी एक दौर है, वो भी एक दौर था।" 

यह पंक्तियां बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना की फिल्म 'दाग' (1973) का एक बहुत ही प्रसिद्ध और यादगार संवाद (dialogue) हैं, जो जीवन की क्षणभंगुरता (transience) को दर्शाती हैं। 

अर्थ:
यह संवाद बताता है कि सम्मान (इज्जत), प्रसिद्धि (शोहरत), प्यार (चाहत), और प्रेम-भावनाएं (उल्फत) दुनिया में हमेशा के लिए नहीं रहतीं। आज जिस स्थान पर आप हैं, कल वहां कोई और था, और कल कोई और होगा। समय और दौर बदलते रहते हैं। 


इज़्ज़तें : सम्मान / Respect
शोहरतें : प्रसिद्धि / Fame
चाहतें : प्यार / Affection
उल्फ़तें : प्रेम / Love 

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