हम तुम घंटियां बजते ही पिंजरों से
निकल कर बाहर आते हैं
नये नये करतब दिखाते हैं
दुश्मनों की तरह एक दूसरे से टकराते हैं
जब लड़-झगड़ के थक जाते हैं
तो वापस अपने पिंजरों में क़ैद हो जाते हैं
हमें हमारी लड़ाई की वजह मालूम नहीं
मुर्गों की हाथापाई
सांप और मोर की लड़ाई
शेर और बैल की मार कटाई
नये राजे नवाबों के पुराने खेल हैं
हम तो सिर्फ़ लड़ाये जाते हैं
हमारा काम सिर्फ़ तमाशा करना है
दूसरों के लिए जीना है
दूसरों के लिए मरना है ...!!
अज्ञात
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