Mirza Ghalib
शराब पीने दे
मस्जिद में बैठ कर
या वो जगह बता
जहाँ पर खुदा नहीं ।
Iqbal
मस्जिद खुदा का घर है,
कोई पीने की जगह नहीं,
काफिर के दिल में जा,
वहाँ पर ख़ुदा नहीं ।
Ahmad Faraz
काफिर के दिल से आया हूँ
मैं ये देख कर
वहाँ पर जगह नही,
खुदा मौजूद है वहा भी,
काफिर को पता नहीं ।
Wasi
खुदा मौजूद हैं पुरी दुनिया में,
कही भी जगह नही,
तू जन्नत में जा
वहाँ पीना मना नहीं ।
Saqi
पीता हूँ ग़म-ए-दुनिया भुलाने के लिए
और कुछ नही,
जन्नत में कहाँ ग़म है
वहाँ पीने में मजा नहीं ।
Meer
हम पीते हैं मज़े के लिए,
बेवजह बदनाम गम है,
पूरी बोतल पीकर देखो,
फिर दुनिया क्या जन्नत से कम है ।
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