Tuesday, February 24, 2026

शराब शायरी

Mirza Ghalib


शराब पीने दे 
मस्जिद में बैठ कर 
या वो जगह बता 
जहाँ पर खुदा नहीं ।


Iqbal


मस्जिद खुदा का घर है, 
कोई पीने की जगह नहीं, 
काफिर के दिल में जा, 
वहाँ पर ख़ुदा नहीं  ।


Ahmad Faraz


काफिर के दिल से आया हूँ 
मैं ये देख कर 
वहाँ पर जगह नही, 
खुदा मौजूद है वहा भी, 
काफिर को पता नहीं  ।


Wasi  


खुदा मौजूद हैं पुरी दुनिया में, 
कही भी जगह नही, 
तू जन्नत में जा 
वहाँ पीना मना नहीं  ।


Saqi


पीता हूँ  ग़म-ए-दुनिया भुलाने के लिए 
और कुछ नही, 
जन्नत में कहाँ ग़म है 
वहाँ पीने में मजा नहीं ।


Meer


हम पीते हैं मज़े के लिए, 
बेवजह बदनाम गम है, 
पूरी बोतल पीकर देखो, 
फिर दुनिया क्या जन्नत से कम है ।

No comments:

Post a Comment