हमने देखा, तो हमने यह देखा,
जो नहीं है वो खूबसूरत है।
नरम लहजे में करो बात कि ज़िंदा हो तुम,
ये तो मुर्दों की सिफ़त है की अकड़ जाते हैं
अब निकल आओ अपने अंदर से,
घर में सामान की
ज़रूरत है।
आज का दिन भी एैश से ग़ुज़रा, सर से पा तक बदन सलामत है।
थी मशवरव कि हमको बसाना है घर नया,
दिल के कहा कि मेरे दर-ओ-बाम ढहाइए।
वार करने को जां निसार आयें हैं,
ये तो इसार है, इनायत है ।
जौन एलिया ✍️
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