#फिजां में घुल रही है महक अदरक की,
आज सर्दी भी चाय की #तलबगार हो गई ।
#अदाएं तो देखिए...
बदमाश चायपत्ती की,
जरा दूध से क्या मिली शर्म से लाल हो गई ।
थोड़ा पानी #रंज का उबालिये
खूब सारा दूध ख़ुशियों का,
थोड़ी पत्तियां #ख़यालों की ।
थोड़े #गम को कूटकर बारीक
हँसी की चीनी मिला दीजिये
उबलने दीजिये #ख़्वाबों को,
कुछ देर तक ।
यह #ज़िंदगी की चाय है जनाब
इसे #तसल्ली के कप में छानकर,
घूंट घूंट कर #मज़ा लीजिये... !!!
अज्ञात
No comments:
Post a Comment