Sunday, January 18, 2026

करोगे याद तो हर बात याद आएगी


करोगे याद तो हर बात याद आएगी
गुज़रते वक़्त की हर मौज ठहर जाएगी

ये चाँद बीते ज़मानों का आइना होगा
भटकते अब्र में चेहरा कोई बना होगा

उदास रह है कोई दास्ताँ सुनाएगी
करोगे याद तो हर बात याद आएगी

बरसता भीगता मौसम धुआँ धुआँ होगा
पिघलती शम्अ' पे चेहरा कोई गुमाँ होगा

हथेलियों की हिना याद कुछ दिलाएगी
करोगे याद तो हर बात याद आएगी

गली के मोड़ पे सूना सा कोई दरवाज़ा
तरसती आँख में रस्ता किसी का देखेगा

निगाह दूर तलक जा के लौट आएगी
करोगे याद तो हर बात याद आएगी

बशर नवाज़ ✍️


No comments:

Post a Comment