राहों पे नज़र रखना, होठों पे दुआ रखना,
आ जाए कोई शायद, दरवाज़ा खुला रखना।
एहसास की शम्मा को, इस तरह जला रखना,
अपनी भी ख़बर रखना, उसका भी पता रखना।
तन्हाई के मौसम में, सायों की हुकूमत है,
यादों के उजालों को, सीने से लगा रखना।
रातों को भटकने की, देता है सज़ा मुझको,
दुश्वार है पहलू में, दिल तेरे बिना रखना।
लोगों की निगाहों को, पढ़ लेने की आदत है,
हालात की तहरीरें, चेहरे से बचा रखना।
भूलूं मैं अगर ऐ दिल, तू याद दिला देना,
तन्हाई के लम्हों का, हर ज़ख्म हरा रखना।
इक बूँद भी अश्कों की, दामन न भिगो पाए,
ग़म उसकी अमानत है, पलकों पे सजा रखना।
क़तील शिफ़ाई✍️
No comments:
Post a Comment