मचल के जब भी आँखों से, छलक जाते हैं दो आँसू
मचल के जब भी आँखों से, छलक जाते हैं दो आँसू
सुना है आबशारों को, बड़ी तकलीफ होती है
मचल के जब भी आँखों से, छलक जाते हैं दो आँसू
मचल के जब भी आँखों से, छलक जाते हैं दो आँसू
सुना है आबशारों को, बड़ी तकलीफ होती है
मचल के जब भी आँखों से, छलक जाते हैं दो आँसू
ख़ुदारा अब तो बुझ जाने दो, इस जलती हुई लौ को
ख़ुदारा अब तो बुझ जाने दो, इस जलती हुई लौ को
चरागों से मज़ारो को, बड़ी तकलीफ होती है
मचल के जब भी आँखों से, छलक जाते हैं दो आँसू
ख़ुदारा अब तो बुझ जाने दो, इस जलती हुई लौ को
चरागों से मज़ारो को, बड़ी तकलीफ होती है
मचल के जब भी आँखों से, छलक जाते हैं दो आँसू
ये दिल है, तो कोई न कोई, कभी तो आस होगी ही
ये दिल है, तो कोई न कोई, कभी तो आस होगी ही
किसे अब हम कहें, दिल को, बड़ी तकलीफ होती है
मचल के जब भी आँखों से, छलक जाते हैं दो आँसू
ये दिल है, तो कोई न कोई, कभी तो आस होगी ही
किसे अब हम कहें, दिल को, बड़ी तकलीफ होती है
मचल के जब भी आँखों से, छलक जाते हैं दो आँसू
गुलज़ार ✍️
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