Saturday, April 4, 2026

वो जो हम में तुम में क़रार था

 वो जो हम में तुम में क़रार था, तुम्हे याद हो के न याद हो, 
वही यानि वादा-निबाह का, तुम्हे याद हो के न याद हो।


वो नए गिले, वो शिकायतें, वो मज़े मज़े की हिकायतें, 
वो हर एक बात पे रूठना, तुम्हें याद हो के न याद हो।


कोई बात ऐसी अगर हुई, जो तुम्हारे जी को बुरी लगी, 
वो बयाँ से पहले ही भूलना, तुम्हे याद हो के न याद हो।


कभी हम में तुम में भी चाह थी, कभी हम से तुम से भी राह थी, 
कभी हम भी तुम भी थे आशना, तुम्हे याद हो के न याद हो।


वो जो लुत्फ़ मुझ पे थे बेशतर, वो करम के हाथ मेरे हाथ पर, 
मुझ सब है याद जरा-जरा, तुम्हे याद हो के न याद हो।


जिसे आप गिनते थे आशना, जिसे आप कहते थे बा-वफ़ा, 
मैं वही हूँ मोमिन'-ए- मुबतला, तुम्हे याद हो के न याद हो


मोमिन ख़ान मोमिन✍️

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