Tuesday, March 31, 2026

दुनिया की रिवायात से बेगाना नहीं हूँ


दुनिया की रिवायात से बेगाना नहीं हूँ 
छेड़ो न मुझे मैं कोई दीवाना नहीं हूँ

इस कसरत-ए-ग़म पर भी मुझे हसरत-ए-ग़म है 
जो भर के छलक जाए वो पैमाना नहीं हूँ

रूदाद-ए-ग़म-ए-इश्क़ है ताजा मिरे दम से 
उनवान-ए-हर-अफ़्साना हूँ अफ़साना नहीं हूँ

इल्ज़ाम-ए-जुनूँ दें न मुझे अहल-ए-मोहब्बत 
मैं खुद ये समझाता हूँ कि दीवाना नहीं हूँ

मैं काएल-ए-ख़ुद्दारी-ए-उलकत सही लेकिन 
आदाब-ए-मोहब्बत से तो बेगाना नहीं हूँ

है बर्क-ए-सर-ए-तूर से दिल शोला-ब-दामाँ 
शम-ए-सर-ए-महफ़िल हूँ में परवाना नहीं हूँ

है गर्दिश-ए-सारार मिरी तक़दीर का चक्कर 
मोहताज-ए-तवाफ़-ए-दर-ए-मय-खाना नहीं हूँ

काँटों से गुज़र जाता हूँ दामन को बचा कर 
फूलों की सियासत से मैं बेगाना नहीं हूँ

लज़्ज़त-कश-ए-नज़्ज़ारा 'शकील' अपनी नज़र है 
महरूम-ए-जमाल-ए-रुख-ए-जानाना नहीं हूँ ।


शकील बदायूंनी ✍️ 

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