दुनिया की रिवायात से बेगाना नहीं हूँ
छेड़ो न मुझे मैं कोई दीवाना नहीं हूँ
इस कसरत-ए-ग़म पर भी मुझे हसरत-ए-ग़म है
जो भर के छलक जाए वो पैमाना नहीं हूँ
रूदाद-ए-ग़म-ए-इश्क़ है ताजा मिरे दम से
उनवान-ए-हर-अफ़्साना हूँ अफ़साना नहीं हूँ
इल्ज़ाम-ए-जुनूँ दें न मुझे अहल-ए-मोहब्बत
मैं खुद ये समझाता हूँ कि दीवाना नहीं हूँ
मैं काएल-ए-ख़ुद्दारी-ए-उलकत सही लेकिन
आदाब-ए-मोहब्बत से तो बेगाना नहीं हूँ
है बर्क-ए-सर-ए-तूर से दिल शोला-ब-दामाँ
शम-ए-सर-ए-महफ़िल हूँ में परवाना नहीं हूँ
है गर्दिश-ए-सारार मिरी तक़दीर का चक्कर
मोहताज-ए-तवाफ़-ए-दर-ए-मय-खाना नहीं हूँ
काँटों से गुज़र जाता हूँ दामन को बचा कर
फूलों की सियासत से मैं बेगाना नहीं हूँ
लज़्ज़त-कश-ए-नज़्ज़ारा 'शकील' अपनी नज़र है
महरूम-ए-जमाल-ए-रुख-ए-जानाना नहीं हूँ ।
शकील बदायूंनी ✍️
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