रूह प्यासी कहाँ से आती हैये उदासी कहाँ से आती है
है वो यक-सर सुपुर्दगी तो भलाबद-हवासी कहाँ से आती है
तू है पहलू में फिर तिरी ख़ुश्बूहो के बासी कहाँ से आती है ।
जौन एलिया ✍️
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