तुम्हारा ख्याल
जैसे बदन को तपस देती
सर्दियों की खिली खिली धूप का अहसास
जैसे वादियों की गोद में
बर्फ की चादर पर
रंग बखेरती धूप की पहली किरण
पहली बारिश के बाद
मिट्टी से आती सोंधी सोधी खुश्बू
तुम्हारा ख्याल
जैसे गुलों पर तितलियों का मंडराना
हवा में तुम्हारे दुप्पटे का लहराना
रात को चांद का खिडकी पर आकर मुस्कराना
तारों की रोशनी में
किसी दीवाने का गुनगुनाना
तुम्हारा ख्याल
जैसे तुम्हारी आगोश में
मदहोश होकर सदियों की नीद सो जाना
कितना खूबसूरत है
तुम्हारा ख्याल
शायद तुमसे भी खूबसूरत
ख़ुदा की इबादत सा
तुम्हारा ख़्याल...
जैसे एक पल में जिन्दगी बिताना ।
गुरिंदर सिंह ✍️
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