Monday, December 8, 2025

तुम्हारा ख्याल



तुम्हारा ख्याल 
जैसे बदन को तपस देती
सर्दियों की खिली खिली धूप का अहसास 
जैसे वादियों की गोद में 
बर्फ की चादर पर 
रंग बखेरती धूप की पहली किरण 
पहली बारिश के बाद 
मिट्टी से आती सोंधी सोधी खुश्बू

तुम्हारा ख्याल 
जैसे गुलों पर तितलियों का मंडराना 
हवा में तुम्हारे दुप्पटे का लहराना 
रात को चांद का खिडकी पर आकर मुस्कराना 
तारों की रोशनी में 
किसी दीवाने का गुनगुनाना

तुम्हारा ख्याल 
जैसे तुम्हारी आगोश में 
मदहोश होकर सदियों की नीद सो जाना

कितना खूबसूरत है 
तुम्हारा ख्याल 
शायद तुमसे भी खूबसूरत 
ख़ुदा की इबादत सा 
तुम्हारा ख़्याल... 
जैसे एक पल में जिन्दगी बिताना ।


गुरिंदर सिंह ✍️ 

No comments:

Post a Comment