मैं तुम्हारी आँखों में
प्यार बनके रहता हूँ,
नूर बनके बसता हूँ,
ख़्वाब बनके ज़िंदा हूँ।
मेरे सारे ख़्वाबों को
इन जमील (सुंदर) आँखों के एक गोशे में
तुम छुपा के रख लेना,
और अगर कभी ये ख़्वाब
फूल बनके महकें,
तो इनकी खुशबुओं में
तुम मेरे नाम के सब हर्फ़ (अक्षर)
एहतियात से रखना ।
ज़िया मोहिउद्दीन✍️
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