तुम्हारा साथ जैसे
गुल में खुशबू
जिस्म में रूह
तुम्हारा साथ
जैसे पहली बारिश के बाद
मिट्टी से उठती खुशबू
तुम्हारा साथ
जैसे अंत के बाद शुरू
मुझ में वजूद तेरा
तुम मे वजूद मेरा
तू नहीं तो में नहीं
तेरी मेरी प्रेम कहानी
जैसे दो जिस्म
एक रूह....!!
गुरिंदर सिंह ✍️
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