Monday, February 9, 2026

पिता

जब भी किसी पुल से गुज़रता हूँ
याद आते हैं पिता

ज़िंदगी की कितनी ही यात्राएँ
उनके कंधों से होकर गुज़री हैं

पिता के काँधे की लंबाई
दुनिया के किसी भी पुल से लंबी है। 


आदित्य रहबर ✍️ 

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