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जब भी किसी पुल से गुज़रता हूँयाद आते हैं पिताज़िंदगी की कितनी ही यात्राएँउनके कंधों से होकर गुज़री हैंपिता के काँधे की लंबाईदुनिया के किसी भी पुल से लंबी है।
आदित्य रहबर ✍️
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