Monday, February 9, 2026

स्मृतियाँ

जैसे मृत्यु आती है बिन बताए
और ठंडी पड़ जाती है पूरी देह

तुम भी आना
अपनी स्मृतियों में
ठीक उसी तरह
ठंडी पड़ी देह को एक गर्माहट देने

हमें यह भ्रम तोड़ना होगा कि
देह का ठंडा पड़ जाना ही नहीं होता
मृत्यु का मात्र एक कारण। 


आदित्य रहबर ✍️ 

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