Monday, February 9, 2026

गर्माहट

तुम्हारी बाँहों से लिपटते हुए
महसूस किया मैंने
दिसंबर में धूप का निकल आना।


रिश्तों के बीच इतनी गर्माहट तो बची ही रहनी चाहिए
जितनी बची रहती है नमी
अकाल के बावजूद पहाड़ों की तराई में

बचा रहता है चाँद
दिन के उजाले में। 


आदित्य रहबर ✍️ 

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