Monday, February 9, 2026

आत्मसमर्पण

मुझे भी युद्ध लड़ना है
किंतु मेरे पास न मिसाइलें हैं
और न ही सैनिकों का जत्था


मुझे नहीं जीतना है कोई देश
न ही कोई क्षेत्र विशेष।


जबकि कुछ नहीं है मेरे पास
सिवाय प्रेम के
तो रख दूँगा अपने हाथ
तुम्हारे हाथों पर और कर दूँगा आत्मसमर्पण


हर बार ज़ंग जीतने के लिए लड़ी जाए
ज़रूरी तो नहीं । 


आदित्य रहबर ✍️ 

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