Friday, August 19, 2022

सजा


एक नेताजी स्वर्ग सिधार गए | उनकी आत्मा को यमराज के सामने पेश किया गया । यमराज ने अपने दूत से पूछा, " कौन- 2 से पुण्य और कौन- 2 से पाप किए हैं इस प्राणी ने ?


दूत ने कहा, "महाराज ! इसने तो सिर्फ पाप ही किए है । "

कौन - 2 से पाप किए हैं, ब्यान करो।

"महाराज! सबसे बड़ा पाप तो इसका ये है कि यह एक भ्रष्ट नेता था  इसने वो सारे पाप किए हैं जो एक भ्रष्ट नेता करता है

मसलन

"मसलन - भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, घोटाले, झूठे वायदे, गरीबों का शोषण, नारी शोषण, कालाबाजारी, चोरबाजारी, देश में जातिवाद, साम्प्रदायिकता, अराजकता फैलाना दूत नेताजी के सारे पाप एक ही सांस में गिना दिए ।

हूँ तो इसके लिए कौन सी सजा का हुक्म दिया जाए

महाराज ! इसको एक बुर्ज के साथ उल्टा लटका कर बाँध दिया जाए और इसके सामने एक खाली कुर्सी और नोटों से भरा ब्रीफकेस रख दिया जाए ।

यमराज खूब हँसे । उनकी हंसी से मानो यमलोक भी गूंजने लगा हंसते-2 उन्होंने कहा, "अरे, यह भी कोई सजा हुई । '

''हां महाराज ! यह बड़ी अजीब सज़ा है जो आज तक किसी प्राणी को नहीं दी गई मगर यह भ्रष्ट आत्मा अपने सामने पड़ी खाली कुर्सी और नोटों से भरा ब्रीफकेस देखकर इतना तडपेगी कि नरक की सारी यातनाएं इसके आगे निर्थक हो जाऐंगी ।"




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