Tuesday, March 10, 2026

मुझे दोस्त बन के दग़ा न दे...

मेरे हम-नफ़स, मेरे हम-नवा, 
मुझे दोस्त बन के दग़ा न दे
मैं हूँ दर्द-ए-इश्क़ से जाँ-बलब, 
मुझे ज़िन्दगी की दुआ न दे

मुझे छोड़ दे मेरे हाल पर, 
तेरा क्या भरोसा है चारागर
ये नगीज़-ए-शब-ए-फ़िराक़ है, 
इसे तू ही अब  न बढ़ा न दे
मुझे दोस्त बन के दग़ा न दे...मेरे हम-नफ़स...

जिसे कह दिया तू ने ज़हर-ए-ग़म, 
तो हमीं ने पी ली हँस के हम
जो कहा तू ने ये ज़हर है, 
तो मुझे न ज़हर-ए-वफ़ा न दे
मुझे दोस्त बन के दग़ा न दे...मेरे हम-नफ़स...

मैं हूँ दर्द-ए-इश्क़ से जाँ-बलब...
जो कहा तू ने ये ज़हर है, 
तो मुझे न ज़हर-ए-वफ़ा न दे
मेरे हम-नफ़स, मेरे हम-नवा, 
मुझे दोस्त बन के दग़ा न दे ।


शकील बदायूंनी ✍️

No comments:

Post a Comment