Monday, February 9, 2026

किताबें

किसी मुल्क की क़ाबिलियत
वहाँ की किताबों से आँकी जा सकती है
धर्मस्थलों या इमारतों से नहीं


किताबों का अलग एक अपना धर्म होता है
जहाँ विज्ञान साँस लेता है
मानवता मुस्कुराती है।

किताबें हर युग में
युद्धों के ख़िलाफ़ खड़ी रही हैं
परमाणु-परीक्षण से ज़्यादा
इस दुनिया को किताबें पलटने की ज़रूरत है

किताबों से बड़ा युद्ध नहीं इस दुनिया में
बर्बरता के ख़िलाफ़। 


आदित्य रहबर ✍️ 

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