एक झूठी मुस्कुराहट को खुशी कहते रहे, सिर्फ़ जीने भर को हम क्यों ज़िन्दगी कहते रहेफासले थे मगर साथ थेएक झूठे रिश्ते को हमक्यों बंदगी कहते रहे...!!
No comments:
Post a Comment