Poetry, Nazm, Ghazal, Shayari, Short Stories Contents.
एक झूठी मुस्कुराहट को खुशी कहते रहे, सिर्फ़ जीने भर को हम क्यों ज़िन्दगी कहते रहेफासले थे मगर साथ थेएक झूठे रिश्ते को हमक्यों बंदगी कहते रहे...!!
गुरिंदर सिंह ✍️
No comments:
Post a Comment