Monday, August 15, 2022

न जाने क्यों.....


न जाने क्यो
तेरी नींदें... मेरी नींदें नहीं
तुम्हारे ख़्वाब.... मेरे ख़्वाब नहीं
शायद कुछ कम है तुझमें... मुझमें

जख़्म हैं मगर टीस नहीं
शायद यह आकर्षण है
इश्क़ नहीं.... !! 





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